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धातु रोग की आयुर्वेदिक दवा | Ayurvedic medicine of spermatorrhea in hindi

धातु रोग की आयुर्वेदिक दवा जानने से पहले यह जानना जरुरी है कि धातु क्या है। धातु को स्पर्म कहा जाता है। स्पर्म तब बहार आता है, जब कोई व्यक्ति उत्तेजित होता है, लिंग से निकलने वाले सफेद द्रव को शुक्राणु या धातु कहा जाता है।

धातु रोग में यौन संबंध न रखने पर भी अनैच्छिक मुक्ति (discharge) होता है। यह दिन के दौरान जागने या रात में सोते समय हो सकता है। आमतौर पर शुक्राणु यौन क्रिया या हस्तमैथुन के दौरान लिंग से बाहर निकलता है, लेकिन कभी-कभी यह लिंग पर उत्तेजना के बिना अपने आप बाहर आ सकता है, जिसे धातु रोग कहा जाता है। इसे धातु का गिरना भी कहा जाता है।

कई लोगों को पेशाब करने से पहले या बाद में वीर्य गिरता है। अनावश्यक वीर्यपात से पीड़ित व्यक्ति पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, खासकर यौन स्वास्थ्य पर।

धातु रोग से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय | Home remedies to get rid of metal disease

  • संतुलित आहार सेवन करना चाहिए।
  • टाइट कपड़े पहनने से बचें।
  • सोने से पहले स्नान।
  • यौन समस्याओं के लिए लौकी का जूस बहुत फायदेमंद होता है। इसमें पोषक तत्व होते हैं।

धातु रोग  की आयुर्वेदिक दवा, जड़ी बूटी या औषधि | Ayurvedic medicine of metallic disease, herbs or medicine in hindi

चंद्रप्रभा वटी– अगर आप धातु रोग यानी धातु गिरने की समस्या से परेशान हैं, तो आप नियमित पौष्टिक चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी का सेवन करके इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। यह आयुर्वेदिक दवाऐ मार्केट में आसानी से उपलब्ध है।

अश्वगंधा | Ashwagandha – अश्वगंधा शुक्र धातु और वीर्य को बढ़ा कर चिर यौवन देने वाली महान औषिधि है। पुरुष रोगों में ये बहुत महत्वपूर्ण है। पुरुषों में अश्वगंधा वीर्य की गुणवत्ता और मांसपेशियों की शक्ति को बढ़ाता है। यह अस्थि मज्जा (bone marrow) समारोह में सुधार करता है और ताकत और बुद्धि भी बढ़ाता है। इसका सेवन काम शक्ति को बढ़ाता है और यौवन प्रदान करता है। इसकी जड़ों का इस्तेमाल कई प्रकार की शक्तिवर्धक दवाओं को बनाने में किया जाता है।

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं की प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करने वाले रोगों के उपचार में भी उपयोगी है, जैसे कि लिकोरिया, वीर्य में चिपचिपाहट की हानि, धातु रोग और यौन कमजोरी।

शतावरी | Shatavari यदि आप धातु रोग से पीड़ित हैं तो शतावरी की जड़ का चूर्ण 2.5 ग्राम, मिश्री 2.5 ग्राम, सुबह और शाम गाय के दूध के साथ रोगी को देने से धातु रोग में बहुत लाभ होता है। !

नियमित रूप से पांच से दस ग्राम चूर्ण शतावरी चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से धातु में वृद्धि होती है! यदि पुरुष यौन रोग और यौन दुर्बलता से परेशान है, तो शतावरी पाक को दूध के साथ लेने से लाभ होता है!

अश्वगंधादि लेह्य ( Aswagandhadi Lehya ) – (केवल गैर-मधुमेह रोगियों के लिए) बाँझपन और अनैच्छिक वीर्य स्राव को ठीक करने में मदद करता है। वीर्य की दुर्बलता को दूर करता है।
खुराक: दिन में दो बार 1.5 चम्मच।

द्राक्षारिष्ट (Draksharishta) – (केवल गैर-मधुमेह रोगियों के लिए) मांसपेशियों की प्रणाली में सुधार करता है। एक अच्छा टॉनिक।
खुराक: दिन में दो बार 20 से 30 मिलीलीटर सिरप भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ।

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