देसी जड़ी बूटी बुखार के लिए | Desi herbs For Fever in hindi

देसी जड़ी बूटी बुखार | Desi herb fever

बुखार कभी भी किसी को भी हो सकता है। बुखार हमारे शरीर की रक्षा के लिए आता है क्योंकि शरीर के तापमान में वृद्धि के साथ बैक्टीरिया और वायरस की वृद्धि कम हो जाती है। जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी है, उन्हें कम संक्रमण होता है, इसलिए उन्हें बुखार भी कम होता है, और जो लोगो की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती हैं। वे बार-बार बुखार आता हैं। आयुर्वेद में प्रतिरक्षा को ओज कहा जाता है। बुखार आमतौर पर जाने के लिए तीन से चार दिन लगते हैं। बुखार आते ही कई लोग तुरंत डॉक्टर के पास जाती हैं। लेकिन हमें हमेशा बुखार के कारण का इलाज करना चाहिए न कि सिर्फ बुखार को कम करने के लिए। लेकिन कई बार बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण बुखार जान लेवा हो जाता है, इसलिए बुखार को नियंत्रित करना भी आवश्यक है। यहाँ हम कुछ देसी जड़ी बूटी के बारे में जानेंगे।

आयुर्वेद में, बुखार को ज्‍वर कहते है। जो कई बीमारियों के लक्षण के रूप में आता है। एलोपैथी के अनुसार, बुखार- जब शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है। बुखार होने पर शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है और बुखार के कारण कई तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं। बुखार के लक्षणों में खांसी, सर्दी, शरीर में दर्द, भूख न लगना और कब्ज आदि हैं। देसी जड़ी बूटीयो का इस्तिमाल करके हम बुखार से बच सकते है।

बुखार के लक्षण | Symptoms of fever in Hindi

शरीर का औसत तापमान लगभग 37 ° C होता है। हालांकि, पूरे दिन शरीर के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहता है, खासकर व्यायाम से। उच्च शरीर के तापमान के अलावा, एक व्यक्ति अनुभव कर सकता है:

  • पसीना आना
  • ठंड लगना
  • सरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • भूख में कमी
  • कमजोरी
  • सुस्ती

बुखार के लिए देसी जड़ी बूटी

अधिक तरल पदार्थ पिएं | Drink more fluids

बुखार के दौरान, व्यक्ति को अधिक पानी का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि शरीर के उच्च तापमान से निर्जलीकरण (dehydration) हो सकता है।

जैसे – पानी , हर्बल टी, ताजे फलों का रस, आप गाजर, अदरक, टमाटर, चुकंदर, खीरा, आदि सब्जियों के रस और मौसमी सब्जी का रस पी सकते हैं, इसमें पानी की कमी भी होगी और उचित पोषण और खनिज भी मिलेंगे।

आराम अधिक करे | Relax more

संक्रमण से लड़ने में बहुत अधिक ऊर्जा लगती है। लोगों को शरीर को ठीक करने में मदद करने के लिए जितना संभव हो उतना आराम करने की आवश्यकता है।

तुलसी की चाय | Basil tea

तुलसी बुखार को कम करने के लिए एक प्रभावी देसी जड़ी बूटी है। इसमें एंटीबायोटिक, एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं। यह बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, सर्दी, खांसी, फ्लू और सीने में जमाव से राहत दिलाने में मदद करता है। तुलसी की चाय गर्म होती है क्योंकि यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करके पसीने को प्रेरित करती है।

तुलसी की चाय  बनाने की विधि | Recipe of basil tea

एक बर्तन में तुलसी के 20 ताजे पत्ते या 1 बड़ा चम्मच सूखे पत्ते और अदरक का एक टुकड़ा ले कर 1 गिलास पानी , लगभग 5 मिनट के लिए उबाल लें, उबले पानी को छान कर उसमे एक चम्मच शहद मिलाएं और राहत पाने के लिए इस चाय को दिन में दो या तीन बार पीएं।

हालांकि, बुखार को कम करने करने के लिए व्यक्ति माथे और गर्दन को एक गीला तौलिया से ठंडा करें है। गर्भावस्था के दौरान तुलसी की चाय का सेवन नहीं करना चाहिए (read- सर्दी खांसी में गिलोय का उपयोग )

हल्दी वाला दूध | Turmeric milk

एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चौथाई टीस्पून काली मिर्च पाउडर मिलाकर पिने से बुखार में लाभ मिलता है। इस दूध को दिन में दो बार पिएं।

पुदीना और अदरक का काढ़ा | Mint and ginger kada

पुदीना और अदरक का काढ़ा पीने से किसी भी प्रकार के बुखार को जल्दी ठीक किया जा सकता है। आप सर्दी और खांसी के लिए अदरक का पानी भी ट्राई कर सकते हैं।

चंदन | Sandalwood

चंदन बुखार को कम करने के लिए एक देसी जड़ी बूटी है। चंदन मिश्रण को माथे पर लगाने से भी शरीर का तापमान कम करने में मदद मिलती है।

इम्यून को बढ़ावा देने वाले खाद्य पदार्थ लें। जैसे –

संतरे के रस यह प्रतिरक्षा बनाने और बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करेगा।

अपने आहार में नारियल पानी शामिल करें। यह बुखार के दौरान शरीर में द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह पोटेशियम में भी भरपूर है। जो तंत्रिकाओं को शांत करने में मदद करता है।

  • बुखार के लिए आयुर्वेदिक औषधियां
  • मृत्‍युंजय रस
  • संजीवनी वटी
  • त्रिभुवनकीर्ति रस
  • सितोपलादि चूर्ण

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